लगेगी आग तो आएँगे घर कई जद मे, यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोडी है!
अगर खिलाफ है होने दो जान थोडी है, ये सब धुआँ है कोई आसमान थोडी है! लगेगी आग तो आएँगे घर कई जद मे, यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोडी है! मै जानता हूँ की दुश्मन भी कम नही लेकीन, हमारी तरहा हथेली पे जान थोडी है! हमारे मुँह से जो नीकले वही सदाकत है, हमारे मुँह मे तुम्हारी जबान थोडी है! जो आज साहीबें मसनद है कल नही होंगे, कीराये दार है जाती मकान थोडी है! सभी का खून है शामील यहाँ के मिट्टी मे, कीसी के बाप का हिन्दोसतान थोडी है! राहत इंदौरी...