एक औरत रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के पास आयी "और अपने शोहर की शिकायत की"
*एक औरत " रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम " के पास आयी* *और अपने शोहर की शिकायत की* *के वो बहोत ज़्यादा अपने दोस्तों को घर पर दावत देता रहता है.* *और में इनकी मेहमान नवाज़ी में खाना बनाते बनाते थक जाती हूँ.* *" रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम " ने कोई जवाब नहीं दिया और वो औरत वापस चली गई* *कुछ देर के बाद " रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम " ने उस औरत के शोहर को बुलाया* *और आप ने फरमाया आज में तुम्हारा महेमान हूँ* *वो आदमी बेहद खुश हुआ* *और घर जाकर अपनी बीवी से बताया उसकी बीवी भी बेहद खुश हो गयी.* *और वक़्त लगाकर मेहनत से अच्छी चीज़ तैयार करने में जुट गई.* *सब से बेहतरीन मेहमान " रसूल के लिए* *इस जबरदस्त पूर तकल्लुफ़ दावत के बाद* *" रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम " ने* *इस शख्स को कहा के अपनी बीवी से कहो इस दरवाज़े को देखती रहे जिस दरवाज़े से में जाऊंगा* *तो उसकी बीवी ने ऐसा ही किया और देखती है के किस तरह से आप " रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम " घर से बाहर निकले है आप के पीछे पीछे बहोत से हसरात (जहरीले कीड़े मकोड़े), बिच्छू बहोत से महल...