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Showing posts from October, 2019

एक औरत रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के पास आयी "और अपने शोहर की शिकायत की"

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*एक औरत " रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम " के पास आयी* *और अपने शोहर की शिकायत की* *के वो बहोत ज़्यादा अपने दोस्तों को घर पर दावत देता रहता है.* *और में इनकी मेहमान नवाज़ी में खाना बनाते बनाते थक जाती हूँ.* *" रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम " ने कोई जवाब नहीं दिया और वो औरत वापस चली गई* *कुछ देर के बाद " रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम " ने उस औरत के शोहर को बुलाया* *और आप ने फरमाया आज में तुम्हारा महेमान हूँ* *वो आदमी बेहद खुश हुआ* *और घर जाकर अपनी बीवी से बताया उसकी बीवी भी बेहद खुश हो गयी.* *और वक़्त लगाकर मेहनत से अच्छी चीज़ तैयार करने में जुट गई.* *सब से बेहतरीन मेहमान " रसूल  के लिए* *इस जबरदस्त पूर तकल्लुफ़ दावत के बाद* *" रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम " ने* *इस शख्स को कहा के अपनी बीवी से कहो इस दरवाज़े को देखती रहे जिस दरवाज़े से में जाऊंगा* *तो उसकी बीवी ने ऐसा ही किया और देखती है के किस तरह से आप " रसूल सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम " घर से बाहर निकले है आप के पीछे पीछे बहोत से हसरात (जहरीले कीड़े मकोड़े), बिच्छू बहोत से महल...

माँ

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बेटा घर में घुसते ही बोला, "मम्मी कुछ खाने को दे दो यार बहुत भूख लगी है"!  यह सुनते ही मैंने कहा, "बोला था ना ले जा कुछ कॉलेज, सब्जी तो बना ही रखी थी"। बेटा बोला, "यार मम्मी अपना इल्म ना अपने पास रखा करो. अभी जो कहा है वो कर दो बस और हाँ, रात में ढंग का खाना बनाना .  पहले ही मेरा दिन अच्छा नहीं गया है" कमरे में गई तो बेटे की आंख लग गई थी. मैंने जाकर उसको जगा दिया कि कुछ खा कर सो जाए. चीख कर वो मेरे ऊपर आया कि जब आँख लग गई थी तो उठाया क्यों तुमने? मैंने कहा तूने ही तो कुछ बनाने को कहा था.  वो बोला,"मम्मी एक तो कॉलेज में टेंशन ऊपर से तुम यह अजीब से काम करती हो. दिमाग लगा लिया करो कभी तो". तभी घंटी बजी तो बेटी भी आ गई थी. मैंने प्यार से पूछा ,"आ गई मेरी बेटी कैसा था दिन?" बैग पटक कर बोली ,"मम्मी आज पेपर अच्छा नहीं हुआ". मैंने कहा," कोई बात नहीं. अगली बार कर लेना". मेरी बेटी चीख कर बोली," अगली बार क्या रिजल्ट तो अभी खराब हुआ ना. मम्मी यार तुम जाओ यहाँ से. तुमको कुछ नहीं पता". मैं उसके कमरे से भी निक...