कभी कभी जी चाहता है...!!!
कभी अपनी हंसी पर भी आता है गुस्सा!
कभी सारे जहाँ को हसाने को जी चाहता है!
कभी छुपा लेते है ग़मों को किसी कोने मे!
कभी सब कुछ सुनाने को जी चाहता है!
कभी रोता नही दिल किसी क़ीमत पर!
कभी यूं ही आंसू बहाने को जी चाहता है!
कभी अच्छा लगता है आज़ाद उडना!
कभी किसी बंधन मे बंध जाने को जी चाहता है!
कभी ऊपर वाले का नाम नही आता ज़ुबा पे!
कभी हमेशा के लिए उसी रब को मनाने को जी चाहता है!
कभी लगती है ज़िन्दगी सुहानी सी!
कभी ज़िन्दगी से उठ जाने को जी ,चाहता है!!!
कभी सारे जहाँ को हसाने को जी चाहता है!
कभी छुपा लेते है ग़मों को किसी कोने मे!
कभी सब कुछ सुनाने को जी चाहता है!
कभी रोता नही दिल किसी क़ीमत पर!
कभी यूं ही आंसू बहाने को जी चाहता है!
कभी अच्छा लगता है आज़ाद उडना!
कभी किसी बंधन मे बंध जाने को जी चाहता है!
कभी ऊपर वाले का नाम नही आता ज़ुबा पे!
कभी हमेशा के लिए उसी रब को मनाने को जी चाहता है!
कभी लगती है ज़िन्दगी सुहानी सी!
कभी ज़िन्दगी से उठ जाने को जी ,चाहता है!!!

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