जब पैगम्बर मुहम्मद का हुस्ने सुलूक देखकर एक बुढ़िया ईमान ले आई Md Wasim Alam

एक बूढ़ी औरत थी जो मक्का मैं उस दौर में रहती थी जब रसूल ऐ खुदा हजरत मुहम्मद सल्लाहू अलैही वसलम्म ने लोगों को इस्लाम की बातें बतानी शुरु की। उस बूढ़ी औरत को लोगों ने कहा यह कोई जादूगर है , उससे दूर रहना क्यूँकी वो जिससे बात करता है या जो उससे मिलता है वो उसकी बातों में आ जाता हैं और इस्लाम को अपना धर्म मान लेता हैं।
वो औरत इस बात से डर गई। उस बूढ़ी औरत ने मक्का छोड़ने का इरादा कर लिया। उसने अपना सारा सामान लिया और वो अब सफर पर निकल पड़ी। सामान ज्यादा था , वजनी थी और औरत थी बूढ़ी। वह बहुत मुश्किल से चल पा रही थी। उसे रास्ते में एक बहुत ही खुबसूरत शख्स मिला जिसने उसका सारा सामान उठा लिया। उस शख्स ने उस बूढ़ी औरत से कहा कि आपको कहा जाना मुझे बता दो। उस बूढ़ी औरत ने जगह का पता दे दिया। रास्ते में वह बूढ़ी औरत कहती हुई जा रही थी कि एक शख्स मक्के में है। वह जादूगर है और लोगो को गुमराह कर रहा हैं। इसलिए ही वह उस शख्स से कही दूर जा रही हैं।
जब वह बूढ़ी औरत उसकी मंजिल पक पहुँच गई तो उस खूबसुरत शख्स से पूछा कि बेटा तुमने अपना नाम नहीं बताया ? कौन हो और कहा के रहने वालों हो तुम ? उस खुबसूरत शख्स ने जवाब दिया कि में वही मुहम्मद हूँ जिसके बारे में तुं रास्ते में बाते करती हुई आ रही थी। जिससे तुम दूर जाना चाह रही थी वह में हूँ। उस औरत ये सब बात सुनकर ताज्जुब हुआ। उस बूढ़ी औरत ने पूछा कि तुम सबकुछ जानते हुई भी मुझे मंजिल पर पहुँचा दिया और मेरी मदद क्यू की।
हजरत मुहम्मद ने कहा कि अल्लाह का हुक्म है कि कमजोर , बुढ़ो और मजदूरो की मदद करो। इससे कोई फर्क नही पड़ता कि वो किस धर्म को मानने वाला हैं। उस बूढ़ी औरत ने हजरत मुहम्मद सल्लाहू अलैहि वसल्लम का हुस्ने सुलूक देखकर चौंक गई। उस बूढ़ी औरत ने कहा कि अगर आप ही मुहम्मद सल्लाहू अलैहि वसल्लम है तो में आप पर ईमान लातू हूँ। गोय़ा जिस मजहब़ के कानून इतने अच्छे हो उसका पैगाम पहुँचाने वाला जादूगर और झूठा हो ही नही सकता। सुब्हानअल्लाह।

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