तुम्हे क्या खबर की तुम मेरे लिए क्या हो

तुम्हे क्या खबर की तुम मेरे लिए क्या हो
तुम मेरे लिए इंसानों में सबसे खास हो
तुम मेरे ईमान को कामिल कर देने वाले हो

मेरी ज़िंदगी को और खुशनुमा बना देते हो
तुम मेरी उलझनों का सुकून हो मुझे मीठी नींद में सुला देते हो सारे ग़मो को भुला देते हो

तुम मेरे पैरों की जंजीर नही मेरे सीने की जिरह हो
जो मेरे हौसले को और बढ़ा देते हो
मुझे परेशान देख कर मुझे तसल्लिया देते हो

मेरी हर बीमारी का इलाज तुम रूहानी हो
तुम कलम के माहिर हों मै तुम्हरी कहानी हूं

मैं तुम्हे रब से इस तरह माँगती हूँ
जैसे कोई अपनी ज़िन्दगी मांगता हो

तुम्हें क्या पता कि तुम मेरे लिए क्या हो


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