मेहमान की फ़ज़ीलत
मेहमान की फ़ज़ीलत
एक औरत का शौहर हर वक़्त किसी न किसी मेहमान को घर ले आता और अपनी बीबी से कहता उनके लिए खाने का इंतज़ाम करो रोज़ाना वो मेहमान के लिए खाने तैयार करती आख़िरकार वो रोज़ के माअमूल से तंग आ गई और एक दिन रसूल ए पाक ﷺ के पास गई और कहने लगी या रसूल अल्लाह ﷺ मेरा शौहर रोज़ाना किसी मेहमान को घर ले आता है और मैं खाने बना के थक जाती हूँ या रसूल अल्लाह ﷺ कोई ऐसा तरीक़ा बताएं के मेरा शौहर घर मे मेहमान न ले आए उस वक़्त नबी पाक ﷺ ख़ामोश रहे और वो औरत नबी पाक की ख़ामोशी देख के घर वापस आ गई अगले दिन नबी पाक ﷺ ने उस औरत के शौहर को बुलाया और कहा के कल मैं तुम्हारा मेहमान हुं वो आदमी बहुत खुश हुआ और आके अपनी बीबी को बताया के आज नबी पाक हमारे मेहमान बन के आएंगे उसकी बीबी बहुत खुश हुई और जल्दी से अच्छे खाने बनाने लगी ! जब नबी पाक ﷺ उस औरत के घर आए तो नबी पाक ने उस के शौहर से कहा के जब मैं खाना खा के वापस जाने लगूं तो अपनी बीबी से कहना मेरे घर से निकलते तक पीछे देखती रहे उसकी बीबी ने ऐसा ही किया जब नबी पाक ﷺ वापस जाने लगे तो उस औरत ने देखा के रसूल अल्लाह ﷺ के साथ बिच्छू सांप और कीड़े मकौड़े सब साथ जा रहे थे! वो ये मंज़र देख के बेहोश हो गई अगले दिन वो फ़िर नबी पाक ﷺ के पास गई तो नबी पाक ﷺ ने उस औरत को बताया के मेहमान अपना नसीब ख़ुद ले के आता है और जो मेहमान के लिए मेहनत की जाती है उस के बदले जब वो वापस जाता है तो साथ उस घर से सारी बलाओं और उस घर के सारे गुनाह साथ ले जाता है

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