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Showing posts from September, 2018

कभी कभी जी चाहता है...!!!

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कभी अपनी हंसी पर भी आता है गुस्सा! कभी सारे जहाँ को हसाने को जी चाहता है! कभी छुपा लेते है ग़मों को किसी कोने मे! कभी सब कुछ सुनाने को जी चाहता है! कभी रोता नही दिल किसी क़ीमत पर! कभी यूं ही आंसू बहाने को जी चाहता है! कभी अच्छा लगता है आज़ाद उडना! कभी किसी बंधन मे बंध जाने को जी चाहता है! कभी ऊपर वाले का नाम नही आता ज़ुबा पे! कभी हमेशा के लिए  उसी रब को मनाने को जी चाहता है! कभी लगती है ज़िन्दगी सुहानी सी! कभी ज़िन्दगी से उठ जाने को जी ,चाहता है!!!

"The Importance of Father" वालिद (Father) की अजमत

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#बाप_की_अज़मत एक शख़्स नबी करीम(स.अ) की ख़िदमत मे हाज़िर हुआ और उसने अपने बाप की शिकायत की के या रसूलल्लाह(स.अ) मेरा बाप मुझ से पूछता नहीं और मेरा सारा माल ख़्रच करदेता है.....! आप(स.अ) ने उनके वालिदे मौहतरम को बुलवाया, जब उनके वालिद को पता चला के मेरे बेटे ने रसूलुल्लाह(स.अ) से मेरी शिकायत की है तो दिल मे बोहौत रंजीदा हुऐ और रसूलुल्लाह(स.अ) की ख़िदमत मे हाज़री के लिये चलदिये.......!चूंकि अरब की घुट्टी मे शायेरी थी तो रासते मे कुछ अशआर कहते हुऐ पोंहचे..........! इधर बारगाहे रिसालत मे पोंहौंचने से पहले "हज़रत जिबराईल(अ.स) आप(स.अ) की ख़िदमत मे हाज़िर हुऐ और फरमाया के अल्लाह सुबहानहु तआला ने फरमाया है के इंका मामला बाद मे सुनियेगा पहले वोह अशआर सुनैं जो वोह सोचते हुऐ आरहे हैं.........जब वोह हाज़िर हुऐ तो आप(स.अ) ने फरमाया के आपका मामला बाद मे सुना जायेगा पहले वोह अशआर सुनाईये जो आप सोचते हुऐ आये हैं..........!!! वोह मुख़लिस सहाबी थे यह सुनकर रौने लगे के जो अशआर अभी मेरी ज़बान से अदा भी नहीं हुऐ मेरे कानौं ने भी नहीं सुने आप के रब ने सुन भी लिये और आपको बता भी दिया..........!...